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टी20 में कुछ शीर्ष एशियाई बल्लेबाज़ स्पिन के सामने तेज़ी से रन क्‍यों नहीं बना पाते हैं?


क्या एशियाई बल्लेबाज़ स्पिन के ख़िलाफ़ आक्रामक बल्लेबाज़ी करने के मामले में सर्वश्रेष्ठ हैं? उपमहाद्वीप में पिचों को देखते हुए लोकप्रिय धारणा यह संकेत दे सकती है कि इस मामले में एशियाई खिलाड़ी सबसे उत्कृष्ट हैं लेकिन टी 20 क्रिकेट में संख्याएं एक अलग कहानी बताती हैं।

मिकी आर्थर ने पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ-साथ पीएसएल और बीपीएल में टीमों को कोचिंग दी है। उनका मानना ​​​​है कि उपमहाद्वीप महान स्पिनरों का उत्पादन करता है लेकिन उन्हें बल्लेबाज़ों के साथ कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। यहां तक ​​​​कि बाबर आज़म और मोहम्मद रिज़वान जैसे बल्लेबाज़ो के साथ भी स्पिन के ख़िलाफ़ उनके खेल को सुधारने के लिए काफ़ी काम करना पड़ता है।

आर्थर ने एशिया कप के दौरान ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के टी20 टाइम आउट पर कहा, “यह कुछ ऐसा था जिसने मुझे चकित कर दिया था। मैंने सोचा था कि उपमहाद्वीप में जाकर कोचिंग देना एक बढ़िया अनुभव है। हम बल्लेबाज़ों को बढ़िया तरीक़े से स्पिन खेलते हुए देखते हैं क्योंकि वह स्पिन खेलते हुए बड़े होते हैं। मैंने कई अविश्वसनीय स्पिन गेंदबाज़ देखे। साथ ही बल्लेबाज़ बेहतर स्पिन खेल रहे थे लेकिन यह सिर्फ़ सफेद गेंद की क्रिकेट में था। वह स्पिन के ख़िलाफ़ बढ़िया रक्षात्मक बल्लेबाज़ी करते हैं।”
“आप जानते हैं कि हमने बाबर, रिज़वान और फ़खर ज़मान के स्वीप शॉट पर काफ़ी मेहनत की है। ये ऐसे क्षेत्र थे जिन पर हमने ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया और अविश्वसनीय रूप से कड़ी मेहनत की। विशेष रूप से बीच के ओवरों में उनकी बल्लेबाज़ी पर हमने काफ़ी काम किया।”

2021 टी20 विश्व कप के बाद से शीर्ष एशियाई टीमों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान) के बल्लेबाज़ों की स्पिन गेंदबाज़ी की तुलना में तेज़ गेंदबाज़ों के के ख़िलाफ़ बेहतर स्ट्राइक रेट है। दूसरी ओर इंग्लैंड (स्पिन के ख़िलाफ़ 134.15 और गति के ख़िलाफ़ 135.26), ऑस्ट्रेलिया (स्पिन के ख़िलाफ़ 131.04 और गति के ख़िलाफ़ 128.48) और साउथ अफ़्रीका (स्पिन के ख़िलाफ़ 142.16 और गति के ख़िलाफ़ 143.17) जैसी टीमों में स्पिन और तेज़ गति की गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ समान स्ट्राइक रेट हैं।

फख़र जैसा शीर्ष स्तर का बल्लेबाज़ जिसने पिछले साल टी 20 विश्व कप के बाद से तेज़ गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ 130 से अधिक की स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं। स्पिन के बनाम उनका स्ट्राइक रेट केवल 105.95 का है। भारत के सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा और केएल राहुल के साथ भी यही मसला है। राहुल ने तेज़ गति के गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ 126 से अधिक की स्ट्राइक के साथ बल्लेबाज़ी की है, लेकिन वह स्पिन के ख़िलाफ़ 86.11 की स्ट्राइक रेट से रन बनाते हैं, जबकि रोहित ने तेज़ गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ 156.27 और स्पिन के ख़िलाफ़ केवल 115.87 के स्ट्राइक रेट से रन बनाया है।

उपमहाद्वीप में कोच के रूप में अपने समय के दौरान आर्थर ने देखा कि एशियाई बल्लेबाज़ पारंपरिक रूप से कलाई के खिलाड़ी होते हैं जो स्पिन के ख़िलाफ़ रिवर्स स्वीप जैसे उच्च जोखिम शॉट का उपयोग नहीं करते हैं। ईएसपीएनक्रिकइंफ़ों के बॉल बाय बॉल डेटा के अनुसार विराट कोहली और बाबर ने 2021 टी 20 विश्व कप के बाद से क्रमशः दो और तीन बार स्वीप या रिवर्स-स्वीप का प्रयास किया है। दूसरी ओर सूर्यकुमार यादव और दिनेश कार्तिक ने क्रमशः 24 बार और 20 बार स्वीप या रिवर्स स्वीप करने का प्रयास किया है।

आर्थर ने कहा, “मैंने पाया कि आधुनिक एशियाई बल्लेबाज़ वास्तव में स्वीप नहीं करते थे। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, साउथ अफ़्रीका ने स्वीप शॉट और रिवर्स-स्वीप का इस्तेमाल एशियाई बल्लेबाजों की तुलना में बहुत अधिक किया।

“रिवर्स स्वीप एक ऐसी चीज़ है जिस पर आपको लगातार काम करना होता है। यह एक कवर ड्राइव की तरह नहीं है जो स्वाभाविक है। यह कुछ ऐसा है जो उपमहाद्वीप के बल्लेबाज़ों को उनके आरामदायक क्षेत्र से बाहर ले जाता है। क्योंकि उन्होंने अपनी उत्कृष्ट कलाई पर बहुत भरोसा किया है। इसलिए यदि आप देखें भारतीय बल्लेबाज़, श्रीलंकाई बल्लेबाज़ या पाकिस्तान बल्लेबाज़ गेंद को अलग-अलग क्षेत्रों में धकेलने के लिए बल्ले का चेहरा खोलने और बल्ले के चेहरे को बंद करने पर भरोसा करते हैं। हालांकि उन शॉट्स में उन्हें पर्याप्त मात्रा में शक्ति नहीं मिलती है। वे शॉट सिंगल या दो रनों के लिए ठीक है लेकिन बाउंड्री के लिए नहीं। इसलिए उन्हें बाउंड्री हासिल करने के लिए विकल्प तलाशने पड़े। बाउंड्री लगाने के लिए बॉल को स्क्वेयर पर मारना आसान है और इसके लिए आपको स्वीप या रिवर्स स्वीप करना होगा।”

क्या विपक्षी टीमों में चार या पांच तेज़ गेंदबाज़ों का सामना करने से एशियाई बल्लेबाज़ों ने स्पिन कम खेलने को प्राथमिकता दी है? आर्थर ने कहा कि यह एक कारण हो सकता है।

“हम शॉर्ट पिच गेंदबाज़ी और तेज़ गति की गेदों के ख़िलाफ़ खिलाड़ियों पर काम करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि यह उन्हें आरामदायक क्षेत्र से बाहर ले जाता है। जहां वास्तव में बल्लेबाज़ों की तकनीक अच्छी होती है, वे उन गेंदों को विशेष रूप से अच्छी तरह से खेलते हैं। जब स्पिन खेलने की बात आती है तो सभी कोच पहले से ही मान लेते हैं कि वे स्पिनरों को अच्छी तरह से खेलते हैं।”



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